उबुन्टू से संबंधित प्रश्नों के उत्तर
हमारे एक पाठक नें कुछ प्रश्न पूछे हैं। मैंने सोचा कि उनके जवाब एक प्रविष्टि में ही क्यों न दे दिया जाए।
(१) क्या हम इस operting system मे internet का use कर सक्ते है तो कैसे ?
बिल्कुल! आपनें विंडोज़ में फायर फॉक्स का इस्तेमाल किया होगा। यही ब्राउज़र आपको उबुन्टू में भी पहले से स्थापित किया हुआ मिलेगा जिसके जरिए आप इंटरनेट का लुत्फ उठा सकते हैं। रही बात कनेक्शन की तो डायलअप/ब्रॉडबैंड दोनों का ही इस्तेमाल किया जा सकता है। मोबाइल से भी इंटरनेट जोड़ने की सुविधा आई है किन्तु मुझे अभी उसके संबंध में अच्छी जानकारी नही है क्योंकि मैं ब्रॉडबैंड वाला इंटरनेट प्रयोग में लाता हूं।
(२) MP3-movies के लिये कोई software भी install करना होगा ?
हां! एमपी थ्री इत्यादि संरूपों में कोई फाइल हो तो उसे चलाने के लिए “उबुन्टू रिस्ट्रिक्टेड एक्सट्रा” स्थापित करने होते हैं। इनके संबंध में आप यहां पढ़ सकते हैं: http://blogs.antarjaal.in/takneek/?p=524
(३) अगर हुम वूबी के जरिए उबुन्टू install करते है तो दुसरी हार्ड डाईव मै से data तो format नही हो जायेगा ?
वूबी है ही इसलिए कि आप हार्ड डिस्क को बिना फार्मेट किये उबुन्टू स्थापित कर सकें। इसलिए इस विषय में निश्चिंत रहें। उबुन्टू स्थापना हेतु यह प्रविष्टि पढ़ें: http://blogs.antarjaal.in/takneek/?p=522
(४) इसको download करना कुछ मुश्किल है इसकी cd कहां मिल सकती है? अगर आप बता सके तो सही होगा|
डाउनलोड करना बिल्कुल भी मुश्किल नही है। यहां से डाउनलोड करे: http://www.ubuntu.com/desktop/get-ubuntu/download
यदि आपके कनेक्शन की गति धीमी है और आप उबु्न्टू डाउनलोड नही कर पा रहे हैं तो उसकी सीडी को मंगाया भी जा सकता है। सीडी मंगाने के लिए यहां जाएं: https://shipit.ubuntu.com/
एरो स्नैप,पीक और शेक क्या हैं?
विंडोज़ ७ में विंडो को नियंत्रित करने के लिए तीन नए तरीके उपलब्ध कराए गए हैं। ये हैं, एरो स्नैप, एरो पीक और एरो शेक। आइए इनके बारे में क्रम से जानें:
एरो स्नैप: किसी विंडो को खींचकर स्क्रीन के ऊपर के किनारे में लेजाकर छोड़िए। विंडो पूरी स्क्रीन में छा जाएगी। फिर विंडो को पकड़कर नीचे खींचिए वह अपने पुराने आकार में आ जाएगी। इसी प्रकार यदि आप उसे दाहिनें या बाएं किनारे में लेजाकर छोड़ेंगे तो वह स्क्रीन के क्रमश दाहिनें या बाएं आधे हिस्से में फिट हो जाएगी। और जब आप उसे वापस खींचेंगे तो वह अपने पुराने स्वरूप में आ जाएगी।
एरो पीक: आपके टास्क बार के दाहिनीं दिशा में आखिर में एक खड़ा आयताकार बटन बना होता है। यदि आप इसपर माउस ऊपर रखते हैं तो सभी खुली हुई विंडो के आरपार दिखाई देने लगता है। यह प्रभाव एरो पीक कहलाता है। एरो पीक आपको अल्ट+टैब बटन दबाने पर भी दिखाई देगा। इस स्थिति में आपको चुनी हुई विंडो के अलावा अन्य विंडो पारदर्शी दिखाई देंगी।
एरो शेक: मान लीजिए कि आपने कई विंडो खोली हुई हैं। यदि आप किसी एक विंडो को पकड़कर हिलाएंगे तो उस विंडो को छोड़कर सभी अपनी न्यूनतम अवस्था में आकर टास्कबार में चली जाएंगी। पुन: हिलाने पर सभी अपनी पूर्व स्थिति में आ जाएंगी।
कम्प्यूटर को गर्म होने से बचाएं
कम्प्यूटर को सुरक्षित तापमान में चलाना बेहद आवश्यक है क्योंकि अधिक तापमान आपके कम्प्यूटर के पुर्जों का जीवनकाल कम कर सकता है और उन्हे खराब कर सकता है। एक और बात गर्म कम्प्यूटर अपेक्षाकृत ठंडे कम्प्यूटर की तुलना में धीमा चलता है इसलिए कम्प्यूटर को सुरक्षित तापमान में रखने से फायदे ही हैं।
आपके कम्प्यूटर का तापमान क्या होना चाहिए?
वैसे तो अलग अलग निर्माताओं द्वारा बनाए गए पुर्जों के सुरक्षित तापमान में भिन्नता होती है। एएमडी और इंटेल दोनों के हिसाब से प्रोसेसर का अधिकतम तापमान ८० डिग्री सेल्सियस के आसपास बैठता है। फिर भी आपके प्रोसेसर का तापमान ९५ डिग्री सेल्सियस से ज्यादा नही होना चाहिए।
कम्प्यूटर होप के जालस्थल में विभिन्न प्रोसेसरों और उनके सुरक्षित तापमान की जानकारी दी गई है।
कम्प्यूटर का तापमान कैसे पता करें?
सामान्यत: आप अपने कम्प्यूटर का तापमान अपने BIOS में जाकर पता कर सकते हैं। किन्तु इसके लिए आपको कम्प्यूटर पुन: चालू करना होगा। इसलिए आप एचडब्लूमॉनीटर का प्रयोग कर सकते हैं। यह मुफ्त है और इसे यहां से डाउनलोड किया जा सकता है: http://www.cpuid.com/downloads/hwmonitor/1.16-32bit.zip
कम्प्यूटर को गर्मी से कैसे बचाएं?
आपने सुना होगा धूल कम्प्यूटर की दुश्मन है। ऐसा इसलिए क्योंकि धूल ऊष्मा की कुचालक होती है और आपके कम्प्यूटर के जिस पुर्जे पर अधिक धूल लगी होगी उससे ऊष्मा निकल नही पाएगी परिणामस्वरूप वह पुर्जा अधिक गर्म हो जाएगा। अर्थात कम्प्यूटर को गर्मी से बचाने के लिए जरूरी है कि बीच बीच में उसकी सफाई करते रहें।
कभी कभी सीपीयू में लगे पंखे काम करना बंद कर देते हैं। अब इसका कारण उनका स्वत: ही खराब होना हो सकता है या फिर धूल की वजह से उनका घूमना बंद हो जाता है। पंखे अंदर की गरमी को बाहर निकालते हैं, अत: जरूरी है कि वो ठीक तरह से कार्य करते रहें। बीच बीच में पंखों की भी जांच करते रहें और यदि कोई पंखा खराब हो जाए तो उसे तुरंत बदल दें।
आपका कम्प्यूटर किस जगह रखा है यह भी उसका तापमान निर्धारित करता है। यानि कि अपने कम्प्यूटर को किसी ऐसी जगह ना रखें जहां कोई आग वगैरह हो या धूप बहुत आती हो। इनसे भी गर्मी बढ़ सकती है।
कम्प्यूटर के तापमान को सही करने के लिए कभी कभार बायोस को भी नवीनीकृत करने की जरूरत पड़ सकती है। इसके लिए अपने मदरबोर्ड निर्माता के जालपृष्ठ में जानकारी खोजें।
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इस लेख के लिए लाइफ हैकर की वेबसाइट से जानकारी प्राप्त हुई। मूल लेख अंग्रेजी में यहां है:
http://lifehacker.com/5570909/how-to-prevent-your-computer-from-overheating-and-why-its-important
उबुन्टू में सॉफ्टवेयर/पैकेज प्रबंधन
आज हम लिनक्स में सॉफ्टवेयर स्थापना के विषय में चर्चा करेंगे । सबसे पहले ये जानना जरूरी है की सॉफ्टवेयर प्रबंधन के मामले में लिनक्स विन्डोज़ से किस प्रकार भिन्न है । विन्डोज़ में कोई भी सॉफ्टवेयर का सेटअप अपने भीतर मुख्य साफ्टवेयरों के साथ साथ सहायक साफ्टवेयरों अथवा अन्य सिस्टम फाइलों को भी समाये रहता है । किन्तु लिनक्स में प्रत्येक सॉफ्टवेयर एक पैकेज के रूप में होता है और उसे चलने के लिए जिन सहायक पैकेजों की आवश्यकता होती है उन्हें अलग से स्थापित करना होता है । लिनक्स में नॉटिलस फाइल प्रबंधक से लेकर फौन्ट तक सब पैकेजों के रूप में होते हैं।
एपीटी तथा डीपीकेजी
उबुन्टू में साफ्टवेयरों का प्रबंधन एपीटी तथा डीपीकेजी नामक दो औजारों के जरिए किया जाता है। डीपीकेजी केवल पैकेजों को जोड़ने अथवा हटाने का कार्य करता है वहीं एपीटी यह कार्य करने के अलावा कौन से पैकेज स्थापित हैं और कौन से सहायक पैकेज हैं जैसी बातों का भी हिसाब रखता है। एपीटी सहायक पैकेजों को स्थापित करने, सॉफ्टवेयरों को अद्यतित करने, पैकेजों में विरोधाभास खोजकर बताने जैसे कार्य भी करता है। इन सभी कार्यों को करने के लिए एपीटी सॉफ्टवेयर कोषों से जानकारी प्राप्त करता है।
सॉफ्टवेयर रिपोजिटरी / कोष
सॉफ्टवेयर रिपोजिटरी / कोष वह स्थान है जहाँ विभिन्न पैकेजों का भंडार उपलब्ध होता है । यह जगह अंतर्जाल में स्थित कोई स्थान अथवा आपकी सीडी रोम कहीं भी हो सकता है। आपकी उबुन्टू की सीडी भी एक सॉफ्टवेयर कोष है। विंडोज़ में किसी सॉफ्टवेयर को स्थापित करना हो तो उसे अंतर्जाल से डाउनलोड करना पड़ता है अथवा सीडी खरीदनी पड़ती है। लिनक्स में लगभग कोई भी सॉफ्टवेयर, सॉफ्टवेयर कोषों से ही स्थापित किए जाते हैं। और यह कार्य एपीटी करता है।
अब चूंकि लिनक्स के ज्यादातर सॉफ्टवेयर मुक्त स्रोत होते हैं अत: उबुन्टू के डेवेलपर उनका स्रोत कोड लेकर उन्हे इस प्रकार पुन: बनाते हैं कि वो उबुन्टू के साथ अच्छी तरह चल सकें। इन सॉफ्टवेयरों को उबुन्टू के आनलाइन सॉफ्टवेयर कोषों पर डाल दिया जाता है, जहां से उबुन्टू उपयोगकर्ता एपीटी जैसे किसी औजार के जरिए अपने कम्प्यूटर में स्थापित कर सकते हैं।
उबुन्टू के साथ यह शायद ही हो कि आप किसी साइट में जाकर कोई सॉफ्टवेयर डाउनलोड करें और उसे स्थापित करें। कभी कभी ऐसा भी होता है कि आप साइट में जाकर कोई सॉफ्टवेयर डाउनलोड करके स्थापित करते हैं और वह सॉफ्टवेयर, सॉफ्टवेयर कोष में हो तो आपको एक सलाह का संदेश दिखाई देता है कि उक्त सॉफ्टवेयर, सॉफ्टवेयर कोष में भी उपलब्ध है और आपको उसका कोष वाला संस्करण ही स्थापित करना चाहिए।
उबुन्टू में पहले से ही कुछ सॉफ्टवेयर कोष जुड़े होते हैं जहां से सॉफ्टवेयर स्थापित किए जा सकते हैं।
कभी कभी आपको अपने पसंद का सॉफ्टवेयर उबुन्टू के कोषों में नही मिलता है। इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि वो सॉफ्टवेयर बहुत नया है और उबुन्टू के डेवेलपरों नें उसे अभी कोष में नही डाला है। ऐसे में आपको सॉफ्टवेयर डाउनलोड करके स्थापित कर लेना चाहिए। ऐसी स्थिति में आप सॉफ्टवेयरों को डेवलपर के पीपीए(पर्सनल पैकेज आर्काइव) के जरिए उसके स्वयं के कोष से भी प्राप्त कर सकते हैं (यदि वह उपलब्ध है)।
उबुन्टू के प्रमुख सॉफ्टवेयर कोष
| कोष का नाम | विवरण |
| Main (मेन) | उबुन्टू को चलाने हेतु यह कोष बहुत आवश्यक है। इस कोष में उबुन्टू के क्रोड पैकेज उपलब्ध रहते हैं। ये वो पैकेज होते हैं जिनसे उबुन्टू को स्थापित किया जा सकता है। हालांकि कुछ ऐसे भी पैकेज होते हैं जिनकी शुरुआती सेटअप में जरूरत नही होती है। यह कैनॉनिकल द्वारा आधिकारिक रूप से समर्थित है। |
| Universe (यूनिवर्स) | यूनिवर्स कोष के सॉफ्टवेयर मुख्य रूप से उबुन्टू तथा डेबियन समुदाय के लोगों द्वारा बनाए तथा संभाले जाते हैं। इसमें ढेरों मुफ्त के सॉफ्टवेयर होते हैं। इनके अद्यतन निश्चित नही होते हैं क्योंकि ये कैनॉनिकल द्वारा समर्थित नही होते हैं। |
| Restricted (रेस्ट्रिक्टेड) | कुछ ऐसे सॉफ्टवेयर (जैसे कि प्रापराइटरी हार्डवेयर ड्राइवर) होते हैं जो कि मुक्त स्रोत नही हैं, परंतु कम्प्य़ूटर चलाने के लिए जरूरी हैं। ऐसे सॉफ्टवेयरों को इस कोष में रखा जाता है। इस कोष के सॉफ्टवेयरों को अद्यतित किया जाता है। |
| Multiverse(मल्टीवर्स) | कुछ सॉफ्टवेयर प्रतिलिप्याधिकार अथवा कानून के द्वारा सुरक्षित होते हैं ऐसे सॉफ्टवेयर इस कोष में रखे जाते हैं। यहां पाए जाने वाले सॉफ्टवेयर उबुन्टू के मुफ्त सॉफ्टवेयर लाइसेंस अनुबंध से मेल नही खाते हैं। इन्हे कैनॉनिकल द्वारा समर्थन प्राप्त नही होता है और यह भी हो सकता है कि ये अद्यतित ना हों। |
| Updates (अपडेट्स) | इसके अंतर्गत दो कोष होते हैं।
Security (सिक्यूरिटी) कोष जरूरी सुरक्षा अद्यतन प्रदान करता है तथा Upadates(अपडेट्स) कोष अनुसंशित अद्यतनों को प्रदान करता है। |
एपीटी तथा डीपीकेजी
उबुन्टू में साफ्टवेयरों का प्रबंधन एपीटी तथा डीपीकेजी नामक दो औजारों के जरिए किया जाता है। डीपीकेजी केवल पैकेजों को जोड़ने अथवा हटाने का कार्य करता है वहीं एपीटी यह कार्य करने के अलावा कौन से पैकेज स्थापित हैं और कौन से सहायक पैकेज हैं जैसी बातों का भी हिसाब रखता है। एपीटी सहायक पैकेजों को स्थापित करने, सॉफ्टवेयरों को अद्यतित करने, पैकेजों में विरोधाभास खोजकर बताने जैसे कार्य भी करता है। इन सभी कार्यों को करने के लिए एपीटी सॉफ्टवेयर कोषों से जानकारी प्राप्त करता है।
एपीटी के जरिए पैकेज प्रबंधन
| कार्य | आदेश |
| सॉफ्टवेयर कोषों की सूची को अद्यतित करना: | apt-get update |
| किसी पैकेज को खोजना | apt-cache search <packagename>
उदाहरण: apt-cache search kubuntu |
| किसी पैकेज के संबंध में पूरी जानकारी देखना | apt-cache show <packagename>
उदाहरण: apt-cache show kubuntu |
| किसी पैकेज को स्थापित करना | apt-get install <packagename>
उदाहरण: apt-get install kubuntu-desktop [इस आदेश के पहले sudo लगाना जरूरी है] |
| किसी पैकेज को हटाना | apt-get autoremove <packagename>
उदाहरण: apt-get autoremove kubuntu-desktop [इस आदेश के पहले sudo लगाना जरूरी है] आपको इसमें हटाए जाने वाले पैकेजों की सूची दिखाई जाएगी जिनमें सहायक पैकेज भी होंगे, आपको Y/N दबाकर आखिरी आदेश देना होगा। |
| किसी पैकेज को पुन: स्थापित करना | apt-get –reinstall install <packagename>
उदाहरण: apt-get –reinstall install kubuntu-desktop [इस आदेश के पहले sudo लगाना जरूरी है] |
सिनैप्टिक पॅकेज प्रबंधक
सिनैप्टिक को आप एपीटी का जी यू आई मान सकते हैं। आइए इसमें कार्य करने के विभिन्न तरीकों को जानें।
| कार्य | तरीका |
| सिनैप्टिक पैकेज प्रबंधक चालू करना | System > Administration > Synaptic Package Manager |
| पैकेजों की सूची को अद्यतित करना | ऊपर के टूलबार में एक “रिलोड” नाम का बटन होता है। उसमें क्लिक करें |
| पैकेजों को खोजना | १. मुख्य टूलबार में क्विक सर्च नाम की जगह बनी होती है। इसमें शब्द लिखकर आप पैकेजों को खोज सकते हैं।
२. क्विक सर्च के बगल में एक सर्च नाम की बटन बनी होती है जिसमें क्लिक करके आप अधिक उन्नत तरीके से पैकेजों को खोज सकते हैं। |
| किसी पैकेज को स्थापित करना | किसी पैकेज पर क्लिक करके फिर “mark for installation” पर क्लिक करके उसे स्थापना हेतु चिन्हित कीजिए। फिर एप्लाई बटन पर क्लिक कीजिए। |
| किसी पैकेज को हटाना | किसी पैकेज पर क्लिक कीजिए फिर मेन्यू में “mark for removal” पर क्लिक करके उसे हटाने हेतु चिन्हित कीजिए। अब एप्लाई बटन पर क्लिक कीजि॥ |
| किसी पैकेज को पुन: स्थापित करना | किसी पैकेज पर क्लिक कीजिए फिर मेन्यू में “mark for reinstalltion” पर क्लिक कीजिए। अब एप्लाई बटन पर क्लिक कीजिए। |
डीपीकेजी के जरिए पैकेज प्रबंधन
डिपीकेजी द्वारा किसी पैकेज को स्थापित करने तथा हटाने के लिए क्रमश: -i तथा -r विकल्पों का प्रयोग किया जाता है। जैसे:
sudo dpkg -i packagename.deb [स्थापना हेतु]
sudo dpkg -r packagename [हटाने हेतु]
कृपया ध्यान रखें कि एक बार डिपीकेजी के द्वारा पैकेज स्थापित हो जाने के पश्चात apt-get autoremove आदेश के द्वारा भी उसे हटाया जा सकता है।
पैकेज को स्थापित करते समय उसकी फाइल के पूरे नाम को लिखना होता है। किन्तु हटाते समय उसके संक्षिप्त नाम भर से काम चल जाता है। यह संक्षिप्त नाम सामान्यत: उस पैकेज फाइल के नाम का शुरुआती हिस्सा होता है।
पैकेज से संबंधित जानकारी देखना: किसी डेब फाइल की जानकारी देखने के लिए -I विकल्प का प्रयोग किया जाता है। जैसे:
dpkg -I packagename.deb
उबुन्टू में सॉफ्टवेयर कोष जोड़ना
उबुन्टू में आप केवल आधिकारिक कोषों का प्रयोग करने के लिए बाध्य नही हैं। आप चाहें तो अन्य कोषों को भी जोड़कर उनके सॉफ्टवेयर एपीटी के जरिए स्थापित कर सकते हैं। आइए देखते हैं कि किसी सॉफ्टवेयर कोष को कैसे जोड़ा जाए।
उदाहरण के लिए स्काइप के कोष को जोड़ने के लिए कुछ इस प्रकार आदेश देना होगा:
deb http://download.skype.com/linux/repos/debian/ stable non‐free
इस आदेश के पश्चात आपको पैकेजों की सूची पुन:लोड करनी होगी जिसके लिए
sudo apt-get update
आदेश का प्रयोग करना होगा।
दूसरा तरीका ये है कि आप System > Administration > Software Sources में जाएं। सॉफ्टवेयर सोर्सेज़ के डायलाग बाक्स में Other Software टैब में जाएं और Add बटन में क्लिक करें। अब ऊपर लिखी लाइन को Apt Line के आगे लिखकर Add Source बटन पर क्लिक कर दें।
जब आप क्लोज़ बटन पर क्लिक करके यह डायलाग बाक्स बंद कर रहे होंगे तो आपसे पैकेजों की सूची को पुन:लोड करने के लिए पूछा जाएगा। तब रिलोड बटन पर क्लिक कर दें।
जब भी आप ऊपर में से किसी भी तरीके का उपयोग करते हैं तब असल में होता ये है कि आपके द्वारा दिया गया कोष का पता /etc/apt/sources.list नामक फाइल में जुड़ जाता है। आप यह कार्य चाहें तो सीधे इस फाइल को खोलकर उसमें वह पता लिखकर भी कर सकते हैं।
कोष कुंजी / रिपॉजिटरी की को जोड़ना
कभी कभी कुछ कोष एक डिजिटल कुंजी के द्वारा हस्ताक्षरित रहते हैं। प्रोग्रामर ऐसा उनके पैकेजों की सुरक्षा के लिए करते हैं। प्रोग्रामर प्रत्येक पैकेज को एक गुप्त आईडी के द्वारा चिन्हित कर देता है जिसे केवल वह ही जानता है, जिसका सार्वजनिक हिस्सा उपयोगकर्ताओं को कम्प्यूटर पर स्थापित करने के लिए दे दिया जाता है।
यह कुंजी फाइल सॉफ्टवेयर प्रदाता की ही साइट पर उपलब्ध होती है। इसका एक्सटेंशन .asc अथवा .gpg हो सकता है। इसे आप अपने कम्प्यूटर पर डाउनलोड कर सकते हैं। ध्यान रखें कि कुंजी फाइल आप सही साइट से ही डाउनलोड करें।
कुंजी फाइल को जोड़ने के लिए निम्न लिखित आदेश दें:
sudo apt-key add keyfile.gpg
दूसरा तरीका : Software Source के डायलाग बाक्स में Authentication टैब में जाएं और फिर IMPORT KEY FILE बटन में क्लिक करके उस कुंजी फाइल को खोजकर आयात कर लें।
स्रोत कोड कंपाइल करके सॉफ्टवेयर स्थापित करना
लिनक्स के कुछ सॉफ्टवेयर बाइनरी रूप में ना आकर स्रोत कोड के रूप में आते हैं। ऐसी स्थिति में उन्हे कंपाइल करके स्थापित करना होता है। यदि आप किसी सॉफ्टवेयर को कंपाइल करके स्थापित करना चाहते हैं तो पहले सिनैप्टिक पैकेज मैनेजर अथवा एपीटी के जरिए build-essential नामक पैकेज स्थापित कर लीजिए। इसके साथ वो कई सॉफ्टवेयर भी स्थापित हो जाते हैं जिनका प्रयोग किसी पैकेज को कंपाइल करने में होता है।
पैकेज के स्रोत कोड को आर्काइव से निकालें फिर टर्मिनल के जरिए उसकी डायरेक्ट्री में जाकर निम्न लिखित आदेश दें:
./configure
make
sudo make install
१. ./configure यह आदेश एक स्क्रिप्ट को क्रियान्वित कर देता है जिसके जरिए यह जांच की जाती है कि इस सॉफ्टवेयर को स्थापित करने के लिए जरूरी सहायक पैकेज कम्प्यूटर में स्थापित हैं या नही।
२. make यह आदेश असल में कम्पाइल प्रक्रिया को शुरू करता है
३. sudo make install सॉफ्टवेयर के कम्पाइल हो जाने के पश्चात यह आदेश फाइलों को कम्प्यूटर की सही जगहों पर रखकर सॉफ्टवेयर को स्थापित कर देता है।
उबुन्टू १०.०४ में नया क्या क्या
उबुन्टू के नवीनतम संस्करण १०.०४ में कई बड़े परिवर्तन किये गये हैं। उबुन्टू के लिए किए जा रहे प्रयासों को देखकर लगता है कि कैनानिकल उबुन्टू को मैक ओएस या विंडोज़ के समकक्ष बना देना चाहता है, यानि कि पूरी तरह से उपभोक्ता पर केंद्रित प्रचालन तंत्र।
उबुन्टू के पिछले संस्करणों में लम्बे समय से गिम्प अनुप्रयोग साथ में आता था। परंतु इस संस्करण के साथ यह नही आता। इसकी जगह फिल्म संपादन अनुप्रयोग पीटीवी को लाया गया है। इसके पीछे सोच यह है कि ज्यादातर लोग उन्नत ग्राफिक संपादन का कार्य नही करते हैं। तस्वीरों की थोड़े बहुत संपादन का कार्य उबुन्टू के साथ आने वाले एफ स्पॉट के जरिए किया जा सकता है। जबकि ज्यादातर लोगों को सामान्य फिल्म संपादन का कार्य करना ही पड़ जाता है, क्योंकि मोबाइल और कैमरे आजकल ज्यादातर लोगों के पास हैं।
आजकल ज्यादातर लोग सामाजिक नेटवर्किंग सेवाओं का भरपूर इस्तेमाल कर रहे हैं, जैसे: ट्विटर, फेसबुक आदि। अत: उबुन्टू के निर्माताओं ने ग्विबर नामक सामाजिक अनुप्रयोग को शामिल किया है। इस अनुप्रयोग के जरिए आप एक से अधिक सामाजिक नेटवर्किंग सेवाओं से जुड़ सकते हैं और अपनी स्थिति उसी अनुप्रयोग से ही बता सकते हैं।
कैनानिकल की सेवा उबुन्टू वन के जरिए प्रत्येक उबुन्टू उपयोगकर्ता को दो गीगाबाइट की मुफ्त आनलाइन भंडारण जगह मिलती है। यदि आप विंडोज़ में ड्रॉप बॉक्स का प्रयोग कर चुके हैं तो आप इस सेवा को ड्रॉप बॉक्स की नकल मान सकते हैं। यदि आप और जगह चाहते हैं तो दस डॉलर प्रतिमाह की दर से आप पचास गीगाबाइट तक की जगह प्राप्त कर सकते हैं।
उबुन्टू वन के साथ ही उबुन्टू वन म्यूजिक स्टोर भी रिदमबाक्स संगीत प्लेयर के साथ आ गया है जहां से आप गाने खोज सकते हैं उनकी एक झलक सुन सकते हैं और पसंद आने पर खरीद सकते हैं|
एक और खास बात आपको इसमें मिलेगी और वो ये कि विंडो के न्यूनतम, अधिकतम और बंद बटन अब दांई ओर से बांई ओर खिसका दिये गये हैं। हो सकता है कि आपको इससे थोड़ी परेशानी हो। पर मुझे लगता है कि आपको इसकी आदत पड़ जाएगी। आप चाहें तो इसे पुरानी वाली स्थिति में भी पा सकते हैं। दाहिंने ऊपरी कोने की खाली जगह देखकर लगता है कि आने वाले संस्करणों में शायद यहां कुछ नई चीज़ें जोड़ी जाएं।

नए उबुन्टू की थीम पहले से सुंदर बनाई गई है और यह दो रंगों में उपलब्ध है। आईकानों के रंग को भी थोड़ा गहरा किया गया है। और हां इस संस्करण के साथ ही उबुन्टू को एक नया खूबसूरत लोगो भी मिल गया है।
उबुन्टू १०.०४ एल टी एस संस्करण है यानि कि इसके लिए आपको डेस्कटॉप संस्करण पर तीन तथा सर्वर संस्करण पर पांच वर्षों का समर्थन मिलेगा। आप उबुन्टू को यहां से डाउनलोड कर सकते हैं: http://www.ubuntu.com/
वे ५ चीजें जो आपको उबुन्टू स्थापित करने के बाद करनी चाहिए
उबुन्टू स्थापित कर लिया? अब आइये ये जाने की वो चीजें जो आपको उबुन्टू स्थापित करने के बाद करनी चाहिए|
- उबुन्टू अद्यतित करना
- फ्लैश, एमपी थ्री आदि का समर्थन स्थापित करना
- उबुन्टू की मुफ्त पुस्तकें डाउनलोड करना
- हिंदी अथवा अन्य भारतीय भाषाओं का समर्थन स्थापित करना
- उबुन्टू वन (Ubuntu One) का इस्तेमाल करना
१. उबुन्टू अद्यतित करना
२. फ्लैश, एमपी थ्री आदि का समर्थन स्थापित करना
ताज़ा ताज़ा स्थापित उबुन्टू में आप फ्लैश या एमपी थ्री फाइलें नहीं चला सकते हैं| इसके लिए उसमे इनका समर्थन स्थापित करना होता है| ऐसा करने के लिए Application > Ubuntu Software Center में जाएँ| फिर दायें कोने में दिए खोज बक्से में restricted लिखें| इतने में आपको एक सूची दिखाई देगी जिसमे Ubuntu Restricted Extras जैसा कुछ लिखा होगा| Ubuntu Restricted Extras में क्लिक करके उसे स्थापित कर लें| ध्यान रहे की इसमे कुछ समय लगता है अत: धैर्य रखें|
३. उबुन्टू की मुफ्त पुस्तकें डाउनलोड करना
उबुन्टू के लिए नए हैं? श्री रविशंकर श्रीवास्तव द्वारा हिन्दी में लिखी गई पुस्तक लिनक्स पॉकेट गाइड से आप आसानी से लिनक्स सीख सकते हैं| इसे आप यहाँ से डाउनलोड कर सकते हैं:
http://raviratlami.blogspot.com/2009/07/blog-post_23.html
अंग्रेजी में उबुन्टू मैनुअल यहाँ से डाउनलोड कर सकते हैं: http://ubuntu-manual.org/
अंग्रेजी में उबुन्टू पॉकेट गाइड एंड रिफरेन्स यहाँ से डाउनलोड कर सकते हैं: http://www.ubuntupocketguide.com/index_main.html
४. हिंदी अथवा अन्य भारतीय भाषाओं का समर्थन स्थापित करना
यदि आप उबुन्टूको हिंदी या किसी अन्य भाषा में उपयोग करना चाहते हैं तो उस भाषा का समर्थन आपको उबुन्टू में स्थापित करना होगा| इसके लिए System > Administration > Language Support में जाएँ|
अब Install/ Remove Languages बटन में क्लिक करें| इससे आपको निम्न लिखित विंडो खुलेगी|
इसमे हिन्दी या जो भाषा आप स्थापित करना चाहते हों उसमें चिह्न लगाकर चुनें फिर Translations, Input Methods तथा Extra fonts को भी चिह्नित कर दें| अब Apply Changes में क्लिक करें| थोड़ा इंतजार करें, आपकी चुनी हुई भाषाएं स्थापित हो जाएंगी|
अब Text टैब में जाएं और Display numbers, dates and currency…. में हिन्दी चुन लें और Apply System-Wide… में क्लिक कर दें| अब Languages टैब में आएं|
इसमें Keyboard input method system: में ibus चुनें|
एक बार सत्रांत करके पुन: सत्रारंभ करने पर परिवर्तन प्रभावी हो जाएंगे|
अब तंत्र > वरीयता > ibus वरीयता में जाएं | अब इनपुट विधि में जाएं|
यहां “कोई इनपुट विधि चुनें” में क्लिक करके हिन्दी या अपनी भाषा की इनपुट विधि चुन लें| उदाहरण के लिए मैंने यहां iTrans चुना है| इसके पश्चात् “जोड़ें” में क्लिक करें|
“बंद करें” बटन पर क्लिक करके विंडो बंद करें|
जब भी आपको कोई हिन्दी प्रयोग करनी हो तो दांई ओर की alt बटन दबाएं| फिर टाइप करें| पहले जैसा अंग्रेजी में टाइप करने के लिए पुन: alt बटन दबाएं|
५. उबुन्टू वन (Ubuntu One) का इस्तेमाल करना
उबुन्टू वन, विंडोज़ के ड्राप बाक्स जैसी सेवा है, जिसमें प्रत्येक उबुन्टू उपयोगकर्ता को दो गीगाबाईट की मुफ्त आनलाइन भंडारण जगह मिलती है| इसमें $१० प्रतिमाह के भुगतान पर ५० गीगाबाईट तक का अपग्रेड उपलब्ध है| यदि आप उबुन्टू वन के लिए नए हैं तो आपको https://one.ubuntu.com/ पर जाकर पंजीकरण कराना होगा|
अब तंत्र > वरीयता > उबुन्टू वन में जाएं|
अब खाता टैब में जाकर खाता प्रबंध में क्लिक करें|
अब वेब ब्राउजर में आपको सत्रारंभ करना होगा(ईमेल पता तथा कूटशब्द डालकर)| यदि आपने पहले से ही सत्रारंभ कर दिया है तो आपके सामने यह पेज दिखाई देगा|
यहां Yes, Sign me in में क्लिक करें|
इस पेज में कम्प्यूटर का नाम भरें और Add this computer में क्लिक करें| अब वरीयता वाली विंडो में औजार टैब में जाकर “संयोजन करें” बटन में क्लिक करें|
अब आपके उबुन्टू वन फोल्डर जो कि घर फोल्डर के भीतर होता है में जो भी फाइलें रखी जाएंगी वो स्वत: ही आपके उबुन्टू वन खाते में अपलोड हो जाएंगी|
उबुन्टू लिनक्स को कंप्यूटर में स्थापित कैसे करें
१. वास्तविक स्थापना: इसमे हार्ड डिस्क को फार्मेट करके अथवा यदि कोई और प्रचालन तंत्र स्थापित हो तो हार्ड डिस्क में विभाजन बनाकर स्थापित किया जा सकता है|

२. वूबी के जरिये स्थापना: यदि आपके कंप्यूटर में विन्डोज़ पहले से स्थापित है और आप हार्ड डिस्क में बिना विभाजन बनाये विन्डोज़ के साथ उबुन्टू स्थापित करना चाहते हैं तो वूबी के जरिये ऐसा किया जा सकता है| वूबी के जरिये स्थापना में एक फाइल बन जाती है जो की आभासी हार्ड डिस्क के रूप में कार्य करती है| इसी में लिनक्स स्थापित हो जाता है|दोनों ही प्रक्रियाएं आसन हैं| परन्तु वूबी वाली अधिक आसान है|
१. वास्तविक स्थापना प्रक्रिया को समझने के लिए इस वीडियो को देखें:
२. वूबी के जरिये लिनक्स स्थापित करने के लिए आपको विन्डोज़ में रहते हुए उबुन्टू की सीडी, सीडी ड्राइव में लगानी है फिर माई कंप्यूटर से सीडी ड्राइव खोलकर वूबी को क्रियान्वित करना है| इससे आपके सामने यह विंडो आ जाएगी:
इसमे Install inside windows चुनिए| अब आपके सामने यह विंडो आ जायेगी:
उपयोगकर्ता नाम और कूटशब्द ध्यान से डालें क्योंकि बिना सही उपयोगकर्ता नाम और कूटशब्द के आप उबुन्टू में सत्रारंभ नहीं कर पाएंगे|
लिनक्स में संगीत सर्वर स्थापित करना
यदि आपके पास कई कम्प्यूटर हैं तो कितना बढ़िया हो यदि आपका संगीत के पूरे संग्रह तक किसी भी कम्प्यूटर से पहुंचा जा सके और गाने सुने जा सकें| ऐसा करने के लिए हमे एक संगीत सर्वर जरूरत होगी| आप चाहें तो किसी पुराने कम्प्यूटर को अपना संगीत सर्वर बना सकते हैं और अपने संगीत संग्रह का केन्द्रीयकरण कर सकते हैं|
तो चलिए शुरू करते हैं:-
हमें एक संगीत सर्वर साफ़्टवेयर की आवश्यकता होगी| यहां हम जावा आधारित सोक्सो (sockso) का इस्तेमाल कर रहे हैं| इसे आप यहां से डाउनलोड कर सकते हैं:
सोhttp://sockso.pu-gh.com/
यह लिनक्स, विंडोज़ तथा मैक तीनों के लिए उपलब्ध है|
एक बार डाउनलोड होने के पश्चात इसकी जिप फाइल से सारी सामग्री निकाल लीजिए|
इसके फोल्डर में आपको linux.sh नाम की फाइल मिलेगी| इसे दो बार क्लिक करके भी चलाया जा सकता है परंतु यदि किसी कारणवश यह ना चले तो इसमें दाहिंना क्लिक करके “गुण” में क्लिक करें| (यदि आप अंग्रेजी में लिनक्स प्रयोग कर रहे हैं तो Properties में क्लिक करें)
अब “अनुमतियां” टैब में जाएं और “प्रोग्राम के रूप में फ़ाइल संचालन की अनुमति दें” विकल्प को सक्षम कर दें|
अब linux.sh पर दो बार क्लिक करने पर यह चालू हो जाएगा|
आप चाहें तो टर्मिनल से भी इसे क्रियान्वित कर सकते हैं| ये आदेश दें:
$> sh linux.sh

इसकी मुख्य विंडो में “Collection” टैब में जाएं और “Add Folder” में क्लिक करके उन फोल्डरों को जोड़ते जाएं जहां जहां आपने गाने रखे हैं|
यह आपके गानों को स्वत: ही अपने डाटाबेस में भर लेगा यदि ऐसा ना हो तो “Scan Now” में क्लिक करके गानों की पूरी सूची को डाटाबेस में भर लें|
अब वेब ब्राउजर खोलें और उसमें यह पता डालें: http://localhost:4444/
आपको कुछ ऐसा देखने को मिलेगा
यहां आप अपने गानों को खोज सकते हैं और अपने पसंदीदा गानों की सूची भी बना सकते हैं| आप http://your-ip:4444 पर जाकर किसी भी कम्प्यूटर से इस संगीत सर्वर तक पहुँच सकते हैं और गानों का आनंद ले सकते हैं| बढ़िया बात ये की इसमे एक नहीं बल्कि सात सात तरीकों/प्लेयरों से गानों को बजाया जा सकता है| जैसे Flex Player, Popup Flash Player, JSplayer आदि|
यदि आपके यहां कई लोग अपने अपने हिसाब से गानों को प्रबंधित करना चाहते हैं तो उपयोगकर्ता खातों को आप Collection Manager के User टैब में जाकर सक्षम कर सकते हैं| और फिर आपके साथ काम करने वाले और लोग भी पंजीकरण कर के अपने अपने हिसाब से गाने प्रबंधित करपाएंगे|
सावधान! वर्डप्रेस चिट्ठों पर साइबर हमला
सावधान! वर्डप्रेस चिट्ठों पर साइबर हमला हुआ है। और एक नही दो दो। यह हमला वर्डप्रेस के नवीनतम संस्करण २.९.२ के चिट्ठों पर हुआ है। इसके जरिए चिट्ठों का सर्च इंजन में स्थान गिरता है तथा उपयोगकर्ताओं के कम्प्यूटरों में मालवेयर पहुंचाया जा रहा है। वर्डप्रेस ने फिलहाल इस विषय में अभी तक कोई बयान नही दिया है।
पहले हमले में होता ये है कि क्लॉकिंग के जरिए सर्च इंजनों को चिट्ठे की वास्तविक सामग्री की बजाए, स्पैम सामग्री दिखाई जाती है जिससे साइट का सर्च इंजनों में स्थान गिर जाता है।
क्लॉकिंग: वह पद्धति, जिसके जरिए सर्च इंजनों तथा असली उपयोगकर्ताओं को एक ही वेबसाइट के द्वारा अलग-अलग सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। इसके लिए यूजर एजेंट अथवा आई पी पतों के हिसाब से सामग्री भेजी जाती है। इससे सर्च इंजन वह सामग्री नही देख पाता है जो कि असली उपयोगकर्ता देखता है।
क्लॉकिंग से आपके चिट्ठे की दुर्गति कैसे होती है समझने के लिए इस वीडियो पर गौर फरमाएं:
साभार: फ्रैंग ग्रूबर
क्रिस्टोफर पेन ने पाया कि यह हैक आपके वर्डप्रेस चिट्ठे के डाटाबेस की wp_options टेबल में rss_ उपसर्ग के साथ एकविकल्प जोड़ देता है जिसमें एनकोडेड जावास्क्रिप्ट होती है। इस rss_ वाले विकल्प को मिटा देने के बाद यह क्लॉकिंग वाली समस्या तो खत्म हो गई परंतु यह दोबारा पैदा हो गया।
एक दूसरे हमले में आपके वर्डप्रेस की स्क्रिप्ट वाली डायरेक्ट्री में jquery.js नामक फाइल बन जाती है और यह टेम्प्लेट के हेडर या फूटर में जोड़ दी जाती है। इसके बाद एक आईफ्रेम आपके चिट्ठे में बन जाता है और यह एक अन्य मालवेयर वाली साइट को आपके चिट्ठे में खोल देता है जिससे आपके पाठकों को नुकसान पहुंचाया जाता है।
अभी यह तो साफ नही है कि ये दोनो हमले एक दूसरे से संबंधित हैं या अलग अलग हैं। फिर भी यदि आपका भी वर्डप्रेस चिट्ठा है तो काफी सचेत रहने की जरूरत है। यदि वह हमले का शिकार हो गया है तो security@wordpress.org पर संपर्क करें और विस्तारपूर्वक जानकारी दें।
आइये जानें LXDE को (Lightweight X11 Desktop Environment)
LXDE
LXDE का पूरा नाम Lightweight X11 Desktop Environment है| इसे केनक्स के अन्य डेस्कटाप वातावरणों से अपेक्षाकृत कम सीपीयू ताकत तथा कम मेमोरी की आवश्यकता होती है| इसे मुख्य रूप से पुराने कम्प्यूटरों तथा नेटबुकों में प्रयोग के लिए बनाया गया है|
यह प्रोजेक्ट २००६ में ताइवानी हैकर हांग जेन ई के द्वारा शुरू किया गया था| उन्हें PCMan के नाम से भी जाना जाता है| ऐसा इसलिए क्योंकि उन्होंने PCManFM नाम का एक फ़ाइल मैनेजर बनाया था जो की LXDE का पहला माड्यूल बना|
LXDE प्रोजेक्ट के लक्ष्य
- एक ऐसा डेस्कटाप वातावरण जो कि तेज हो और ऊर्जा की बचत भी करे
- संसाधनों का उपयोग कम से कम हो (कम रैम, कम सीपीयू उपयोग, डिस्क पर कम जगह घेरे)
- सर्वसुविधा सम्पन्न डेस्कटाप
- बहुभाषीय समर्थन
LXDE के घटक
- PCMan File Manager
- LXLauncher, easy-mode application launcher
- LXPanel, desktop panel
- LXSession, session manager
- LXAppearance, theme switcher
- leafpad, text editor
- Xarchiver, archiving
- GPicView, image viewer
- LXMusic, an xmms2 client, audio player
- LXTerminal, terminal emulator
- LXTask, task manager
- LXDM, X display manager
- LXNM, lightweight network connection helper daemon for LXDE supporting wireless connections (Linux-only)
- Openbox, window manager
अन्य डेस्कटॉप वातावरणों से अलग LXDE के घटक इसमें कसकर एकीकृत नही किए गए हैं| यानि की इसके घटक स्वतंत्र रूप से कार्य कर सकते हैं|
उबुन्टू में LXDE स्थापित करना
ऐसा करना बहुत आसान है| टर्मिनल में यह आदेश दें:
sudo apt-get install lxde
LXDE की तस्वीरें
LXDE की मुख्य वेबसाइट: http://lxde.org/
स्रोत: विकीपीडिया

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